आंटी की चुदाई बडे मजे से

आंटी की चुदाई बडे मजे से

हेलो मेरे दोस्तों, और आंटीयो और भाभियों की चूत को मेरे खड़े लंड का सलाम. मैं आशीष रायपुर छत्तीसगढ़ से अपनी तीसरी हिंदी सेक्स स्टोरी आप सब के सामने पेश करने जा रहा हूं.

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इस कहानी में में आपको बताऊंगा की मैंने आंटी और स्नेहा दीदी की चूत और गांड किस तरीके से चुदाई की और थ्रीसम का भरपूर मजा दिया भी और खुद लिया भी. तो अब मैं अपनी स्टोरी पर आता हूं.

 

तो जैसा की पिछली स्टोरी में मैंने दीदी की पहली चुदाई की और फिर आंटी से थ्रीसम करने का प्लान बनाने को कहा, तो आंटी ने बताया कि दीदी का सातवा सेमिस्टर शुरु हो चुका है और उसे वीकली एग्जाम की प्रिपरेशन करनी होती है.

 

फिर आंटी ने दीदी को पूछा की कब करने का प्रोग्राम रखेंगे तो दीदी बोली कि हां तो ठीक है ना मम्मी विक टेस्ट खत्म होने की लास्ट दिन शाम को थ्रीसम करते हैं. तो आंटी और मैं दोनों ने हां कर दी. फिर मैंने कहा की हम अब हफ्ते भर वेट करते हैं.

 

तब तक मैं आंटी को नहीं चोदुंगा तो दीदी के साथ ही इंसाफ होगा. और पूरे हफ्ते भर की चुदाई की तड़प के बाद थ्रीसम करने का अलग ही मजा आएगा तब तक आंटी को उंगलियों और आर्टिफिशियल लंड से ही काम चलाना पड़ेगा.

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अब हम तीनों ही नेक्स्ट वीक का वेट करने लगे थे. हमारे दिन तो काटे नहीं कट रहे थे. फिर एक हफ्ते बाद सैटरडे की शाम को में आंटी के घर चला गया और उसके घर पर जाते वक्त मेने अपने घर पर बोल दिया कि दोस्त के घर जा रहा हूं और तिन चार घंटे से पहले नहीं आऊंगा, हम लोगो को मिल कर प्रोजेक्ट पे काम करना हे इसीलिए थोडा देर हो जायेगा.

 

फिर मैं उसी दूसरे रूम की खिड़की पर जाकर खड़ा हो गया. खिसकी पे कांच लगा हुआ था और अंदर से खुलता था. मैं जब भी आंटी के घर जाता था तो ऐसे ही जाता था क्योंकि सामने के मेन डोर से जाने के कारण मुझे कोई भी देख सकता था.

 

और मुज पर कोई भी  डाउट कर सकता था और मेरा घर भी तो बगल में ही था तो मैं पकड़ा जा सकता था, इसलिए आंटी के घर ऐसे आना जाना किया करता था.

 

फिर अपनी स्टोरी पर आता हूं. मैं खिड़की के रस्ते से रूम में घुसा और अपनी शर्ट और गंजी उतार कर बेड पर लेट गया. बस एक लूज सा लोवर पहना हुआ था.

 

आंटी ने सलवार सूट और टाइट लेगी पहनी हुई थी. सुट सामने से डीप नेक का था और आंटी की क्लीवेज काफी ज्यादा दिखाई दे रही थी और बेक साइड चेन से कमीज ओपन होती थी.

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आंटी ने वाइट ब्रा पहनी थी और सूट ब्लैक कलर का था, तो ब्रा और बूब्स एकदम मस्त से दिख रहे थे. मैंने आंटी से कहा कि आज आप मुझे सिड्यूस करो और सेक्स के लिए राजी करो. में ५:३० बजे ही आंटी के घर आ गया था. दीदी भी कॉलेज से आने ही वाली थी.

 

यहाँ पर आंटी ने मेरा लंड लोवर के उपरसे अपने हाथों से दबाना और मसलना शुरू करना शुरू कर दिया था तो मेरा लंड टाइट होकर खड़ा हो गया तो आंटी ने मेरा लोवर अपने गोर और मुलायम हातो से नीचे किया और लंड को हाथों से ऊपर नीचे करने लगी फिर अपना थूक लगा कर लंड को चिकना किया और मुंह में भर कर चूसने लगी. आंटी तो वैसे भी लंड चूसने में एक्सपर्ट हो गई थी.

 

तो मस्त मज़े की साथ लॉलीपॉप की तरह पूरा लंड मुंह में अंदर तक ले कर डीप थ्रोटिंग कर रही थी मुझे भी बहुत मजा आ रहा था और मुझे लग रहा था की में तो अपने सरे कपडे उतार कर जन्नत की से कर रहा हु. आंटी  मेरा लंड चूसते चूसते अपने हाथो से मेरी निपल को दबा रही थी और मेरे मुह से अहह एस आग्ग्ग ओह्ह हां हह हहह उम्म्म ओम्म्म उह्ह्ह एस अग्ग्ग ओह्ह अम्म्म ओह हहह ओह हहह निकल रहा था.

 

फिर आंटी बैड पर चढ़ गई और मेरे सामने घोड़ी बन गई उन्होंने मुझे ही अपने कपड़े उतारने को कहा, तो मैंने उनकी चेन को नीचे खींचा और सुट को उनके कंधों से नीचे कमर तक कर दिया और उनकी ब्रा का हुक खोल कर बूब्स को आजाद कर दिया. में तो उनके बूब्स को देख कर एकदम मस्त हो गया और मेरा लंड सलामी देने लगा था.

 

फिर उनके  सूट को कमर से धीरे से नीचे करने के साथ उनकी लेगी भी नीचे खींचने लगा उनकी गांड की लाइन अब दिखने लगी थी. क्या मस्त मोटी गदराई हुई तू थुलथुली मस्त गोरी गांड थी आंटी की.

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मैं तो पूरे मजे लेकर आंटी की लेगी खोल रहा था. इतनी मोटी मदमस्त गांड को इस तरह से देखने में और अपने दोनों हाथो से दबाने और मसलने में थप्पड़ मारने का जो मजा आता है ना वह इमेजिन करना भी डिफिकल्ट है.

 

तो मैंने आंटी की ड्रेस उतार दी और पूरा अपना खड़ा मोटा लंबा लंड आंटी की गांड पर पटकने लगा और फिर एक ही झटके में आंटी की चूत में अपना लंड डाल दिया और पहले ही धक्के के साथ फुल स्पीड में आंटी को चोदना शुरू कर दिया.

 

चुदाई का सेशन अभी स्टार्ट ही हुआ था की अब हमे गेट के खुलने की आवाज आई जिसका मतलब था दीदी कॉलेज से आ गई थी. तो आंटी चुदते हुए चिल्लाई कि स्नेहा तू आ गई क्या? तो दीदी बोली हां आ गई, तो आंटी बोली की खिड़की से अंदर आ जा मैं दरवाजा अभी नहीं खोल सकती हु. तो दीदी खिड़की पर आकर खड़ी हो गई और अंदर हमारी चुदाई देखने लगी थी.

तो आंटी को गालियां देने लगी कि साली रंडी इतनी क्या तेरी चूत और गांड में खुजली हो रही थी जो मेरा इंतजार भी नहीं कर सकती थी और फिर भी खिड़की तो खुली ही थी तो दीदी अंदर आ गई और अपने कपड़े उतार कर बाथरूम में नंगी ही  घुस गई. वह हाथ मुंह धो कर फ्रेश होकर ५ मिनट में तुरंत वापस आ गई और आंटी के मुंह के पास आकर लेट गई और अपनी दोनों घुटने मोड़ कर टांगे खोल ली और चूत को आंटी के लिप्स पर पास ले गयी और आंटी दीदी की चूत चाटने लगी.

मैं आंटी की कभी चूत को चोदता तो कभी गांड में लंड डाल कर गांड मारता. १५ मिनट तक इसी पोजीशन में आंटी को चोदने के बाद हमने पोजीशन चेंज कि. मैं सीधा हो कर लेट गया और आंटी मेरे पास ऊपर आ कर लंड पर अपनी चूत सेट कर के बैठ गई और ऊपर नीचे कूदने लगी उछलने लगी और खुद को चुदवाने लगी. आह्ह ओह्ह हहह ओह्ह हहह एस अह्ह्ह इह्ह हहह  ऐसी आवाज कर के जोर से मोनिंग भी करने लगी थी.

इतने में स्नेहा दीदी मेरे मुंह के ऊपर अपने दोनों घुटनों को मोड़ कर बैठ गई और मैं उनकी चूत को चाटने लगा. उन्होंने अपने दोनों हाथों की उंगलियों से अपनी चूत खोल दिया जिस से मैं और आसानी से उनकी चूत को अंदर तक चुस पाउ और चाट पाऊ.  मैं अपनी टंग से उनकी क्लिटरिस को चाटने लगा वही आंटी की ताबड़तोड़ चूत चुदाई चालू थी. हमें आधा घंटा हो गया था और आंटी अब तक तीन बार अपना पानी छोड़ चुकी थी.

फिर मैं उठा और दीदी से लंड चूसने को बोला. उन्होंने जैसे लंड अपने हाथ से पकड कर अपने मुह में ले लिया और लंड चूसने लगी. ४५ मिनट तक आंटी को चोदने के बाद में दीदी के मुंह में ही झड़ गया.

आंटी अब इतनी देर तक सेक्स करने के बाद थक गई और लेट गई तो दीदी ने आंटी की चूत चाटनी शुरु कर दी. आंटी की चूत एकदम फेल गयी थी और उनकी चूत का क्लिटरिस बाहर निकल कर आ गया था. जिसे दीदी अपने होंठों और जीभ से चूस रही थी आंटी की चूत के अंदर तक अपनी जीभ डाल कर चूत का रसपान कर रही थी. वह इस पोजीशन में घोड़ी बनी हुई थी.

तो मेरा लंड दीदी की चूत और गांड देख कर फिर से खड़ा हो गया और फिर पीछे से दीदी की चूत चाटने लगा और उनकी चूत को उंगलियों से खोल कर तीन उंगलियां एक साथ चूत के अंदर बाहर करने लगा. दीदी बहुत जोर जोर से चीख पड़ी लेकिन मैंने अपना काम चालू रखा और बीच में अपना मुंह भी घुसा देता और जीभ से चाट देता.

फिर मैंने अपना लंड दीदी की चूत में थोड़ा सा रगड़ा और अंदर पूरा का पूरा एक बार में ही घुसेड़ दिया और धकाधक जोर से पूरी ताकत के साथ ज़टके मारने लगा था. कुछ ओर से पूरी ताकत के साथ झटके मारने लगा तो दीदी दर्द से बुरी तरह तड़प रही थी और जोर जोर से आह्ह ओह्ह हहह ओह्ह हहह इओह हहह एस मोंन करने लगी थी. उनकी चूत की सील टूटी हुई एक ही हफ्ता हुआ था और उस एक हफ्ते में वह एक बार भी नहीं चूदी थी.

तू उसकी चूत  एकदम टाइट थी तो ऐसी जोर दार दर्दभरी चुदाई वह सहन नहीं कर पा रही थी. मैं पीछे से धक्के पर धक्के मारा जा रहा था उनकी पूरी बॉडी शेक हो रही थी और वह कांप रही थी. उनके बूब्स हवा में तेजी से जूल रहे थे जैसे एक घडी में पेंडुलम जुलता है ना वैसे. उनको चुदाई में इतना दर्द हो रहा था कि आंटी की चूत चाटनी बंद कर दी.

तो आंटी ने बाल पकड़ कर उनका मुंह अपनी चूत में घुसा दिया ताकि उनकी चिल्लाने की आवाज बंद हो जाए. मैं दीदी को घोड़ी वाले पोज में २० मिनट तक चोदता रहा. वह अभी दो बार जड़ी थी लेकिन मैं वियाग्रा का थोड़ा सा हेवी सा डोज लेकर चुदाई कर रहा था.

इसलिए एक बार भी झड़ने के बाद मुझे सेकंड राउंड में काफी टाइम लग रहा था. इसे आप लेडिज यह मत समझना कि मैं बिना वियाग्रा  के लंबा नहीं टिक सकता ऐसा नहीं है. मैं चुदाई का भर पूर मजा देने में पूरी तरह से केपेबल हूं.

फिर दीदी को मैंने पोजीशन चेंज करने को कहा और उनके पीछे आ के लेट गया. उनकी टांग मैंने ऊपर उठाई और आंटी को होल्ड करने को बोला तो आंटी ने दीदी की टांगे पकड़ ली. फिर मैंने अपना लंड पीछे से दीदी की चूत में डाला और फिर स्पीड से चोदना चालू कर दिया.

मैं अपने एक ही हाथ से उनके दोनों बूब्स दबा रहा था और मस्त बुलेट ट्रेन की स्पीड से दीदी की चूत की मरम्मत कर रहा था. दीदी की चूत चुद कर लाल हो चुकी थी. आधे घंटे तक ऐसे ही लेट कर दीदी की बेक अपनी तरफ कर के आंटी की हेल्प से दीदी की बेतहाशा चुदाई करने के बाद आखिरकार मेरा पानी निकलने वाला था.

तो मेने अपनी फुल स्पीड में दीदी की चूत में ही अपना पानी छोड़ दिया और ऐसे ही बिना लंड निकाले लेटा रहा. और आंटी मेरे बगल में आकर लेट गई मैं दोनों के बीच लेटा था. हम तीनों ही बुरी तरह से थक चुके थे.

फिर मैं उन दोनों की चूत को अपने दोनों हाथों से सहलाने लगा मैं उठ कर बैठ गया और आंटी के घुटनों को मोड़ कर उनकी चूत को चाटने लगा और दूसरे हाथ से दीदी की चूत में उंगली करने लगा. वह बोली हम दोनों की इतनी बेदर्द और बेरहम चुदाई के  बाद भी तेरा मन नहीं भरा क्या रे?

तो में बोला कि नहीं अभी तो दीदी आपकी गांड मारनी बाकी है तो वह बोली कि प्लीज आज नहीं कल मार लेना. आज मेरी चूत बहुत ज्यादा दर्द कर रही है और बदन भी दर्द कर रहा है तेरे झटकों ने तो जैसे मेरी हड्डिया ही तोड़ दी हो ऐसा फील हो रहा है. सच में जंगली जानवर से भी गया गुजरा है, कितनी हवस है तेरे अंदर आराम से उंगली कर ना.

फिर में उठा और बोला कि कल तो संडे है अंकल तो घर में ही रहेंगे फिर कैसे आपकी गांड मार पाऊंगा तो आंटी बोली की तू टेंशन मत ले. मैं उन्हें बाहर घूमने ले जाने को कह दूंगी और यह पढ़ाई का बहाना बनाकर घर में रुक जाएगी तो तीनों एग्री हो गए फिर मैंने अपने कपड़े पहने और घर चला गया.

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