पडोसन आंटी की चुदाई होटल मे

पडोसन आंटी की चुदाई होटल मे

में सुमेर एक  बार फिर हाजिर हु अपनी नई कहानी ले कर. जिन लोंडो और लोंडिया ने मेरी चुदाई स्टोरी पड़ी, और मुझे मेल किया. उसके लिए आप सभी को धन्यवाद.

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अब में आपका किंमती वकत जाया ना करते हुए, अपनी कहानी पर आता हु. क्युकी मेरे बारे में आपने मेरी पिछली कहानी “पड़ोसन चाची की चुदाई बाथरूम में” में पढ़ा ही होंगा.

मेरी ये कहानी भी मेरे पडोस में रहने वाली आंटी की है. उनका नाम शांति है. और उम्र लगभग ३५ साल होगी. दिखने में थोड़ी मोटी है. लेकिन बहुत खुबसुरत हे, उनको देख कर हर कोई उनके साथ चुदाई की कल्पना तो जरुर करेगा. फिगर ३८-३६-४० का होगा. उनके ३ बेटे है. जो कुवैत में काम करते है. और उनके पति भी कुवैत में ही है. जो साल में एक बार घर आते है. ये बात तब की हे जब में फाइनल इयर में था.

 

आंटी का घर मेरे घर के पास में ही है. तो आंटी को जभी कोई काम होता तो मुझे बुलाती, और में भी उनका हर काम जो वो बोलती थी कर देता था. मेरी हमेशा कोशिश रहती थी की, में आंटी को टच करू, और मेरे शेतानी दिमाग में बस यही ख्वाहिश थी की, काश एक बार आंटी बिना कपड़ो के दिख जाये.

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आंटी का बाथरूम घर के पास बनी गली में था. और बाथरूम के साइड में थोड़ी खाली जगह पड़ी थी. वहा कोई आता जाता नही था. तो आंटी अक्सर बाथरूम के बहार उस खाली जगह पर बैठकर नहाया करती थी. उनके बाथरूम के ठीक सामने एक पुराना मकान बना हुआ है. जो पिछले ७ साल से बंध पड़ा हुआ था. और उस मकान की एक खिड़की आंटी के बाथरूम के सामने ही खुलती थी. जहा से बाथरूम साफ साफ नजर आता था.

 

एक दीन में खाली बेठा बेठा आंटी के बारे में ही सोच  रहा था. तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, और उस मकान की छत पर पहुच गया, और वहा से अंदर गया. और वो खिड़की जो आंटी के बाथरूम के सामने थी. मेने एक छोटा सा छेद कर दिया, जिस से जांक कर बहार का नजारा देखा जा सके.

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बस फिर क्या था, में दुसरे दिन जब आंटी के नहाने का टाइम हुआ, में उनसे पहले उस मकान में उस खिड़की के पास पहुच गया. और आंटी का वेट करने लगा. थोड़ी देर बाद आंटी आ गयी. पहले तो उन्हों ने अपने कपड़े एक तरफ रख दिए. उसके बाद जो पहने हुआ थे, एक एक कर के वो खोलने लगी.

 

पहले साड़ी को खोला, उस के बाद ब्लाउज, उन्हों ने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी.वह उसने किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी और उन्हों ने वो भी निकाल दी. अब उनके ३८ की साइज़ के दूध मेरे सामने थे. में तो पागल ही हो गया. क्या चीज थी यार, एकदम गोरे जिस्म पर पिंक कलर के निप्पल कमाल लग रहे थे. उसके बाद उन्हों ने पेटीकोट के अंदर से ही अपनी पेंटी निकाल दी. और नीचे बेठ गई.

 

वहा पर कोई था नही जो उनको देख सके. तो उन्हें इस बात की कोई चिंता नही थी, की उनका पेटीकोट कहा जा रहा है. वो जेसे ही नीचे बेठी उनकी चूत मुझे दिख गई. जिस पर घने काले बाल थे. फिर वो नहाने लगी.

 

और साबुन से अपनों पूरी बॉडी मसलने लगी. उन्हों ने थोडा साबुन हाथ पर लगाया और पेटीकोट उपर कर के अपनी चूत पर रगड ने लगी. मुझे उनकी चूत अब साफ़ साफ नजर आ रही थी, एकदम डबल रोटी की तरह फूली हुई.

 

ये सब देख कर मेरा लंड पूरी तरह से गरम हो गया था, तो मेने उसको पेंट से बहार निकाला, और मुठ मारने लगा. और आंटी को देखने लगा. आंटी अपनी एक ऊँगली से अपनी चूत की चुदाई कर रही थी. और एक हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी. मेने सोचा भी नही था की आंटी ऐसा कुछ करेंगी.

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कुछ देर बाद आंटी जड गई. और इधर मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया. आंटी नहा कर घर में चली गई. और में भी घर पे आ गया. बस उसके बाद ये मेरा रोज का काम हो गया. और में रोज आंटी को नहाते देखता, और मुठ मार कर खुद को शांत करता.

 

उस के बाद में आंटी को गंदी नजर से घूरता था. और कभी कभी उनकी गांड ओर बूब्स से नजर ही नही हटाता, ये बात आंटी ने भी नोटिस की. एक दिन उन्हों ने मुझे घूरते हुआ देखा, और मुझसे बोली, तुम मुझे ऐसे क्यों देखते हो, जेसे अभी खा जाओगे. तो मेने भी उनको डबल मीनिंग में बोला की, खाना तो चाहता हु पर आप खिलाओगे नही.

 

तब से आंटी मुझ से खुल कर बाते करने लगी. एक दिन उन्हों ने मुझे गर्ल फ्रेंड के बारे में पूछा, तो मेने बोला, अभी तक तो नही हे, अगर आपकी नजर में कोई हो तो बताओ.

 

उन्हों ने जवाब दिया, एक हे तो पर थोड़ी बड़ी हे, चलेगा? में उनका इशारा समज गया. और जट से हा बोल दिया. फिर उन्हों ने किसी दिन उस से मिलवाने का वादा किया, और मेने गाल पर एक पपी कर ली. उसके बाद हमने चाय पि, और में वहा से चला गया. और उस दिन का वेट करने लगा जिस दिन आंटी मुझे किसी से मिलवायेगी.

 

कुछ दिन बाद आंटी ने मुझे कॉल किया. और बोला की कल उस से मिलने के लिए तैयार रहना. में सुबह जल्दी उठ गया. और रेडी होकर आंटी के घर पहुचा गया. तब तक आंटी भी रेडी हो गई थी. और हम कार में बेठ कर मेरी मंजिल की ओर चल पड़े.

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कुछ देर बाद हम सिटी पहुच गये. और आंटी ने मुझे एक होटल में चलने को बोला. जहा उन्हों ने पहले से ही रूम बुक किया हुआ था. हम होटल के रूम में पहुचे. में बिस्तेर पर बेठ कर पानी पी ने लगा. और आंटी चेंज करने के लिए चली गई.

 

जब वो चेंज कर के बहार आई तो में सब कुछ समज गया, की आंटी खुद को चुदवाने के लिए, मुझे यहाँ लेकर आई थी. और जिस लडकी की बात वो कर रही थी. वो कोई ओर नही खुद ही थी. क्युकी जब वो बहार आई तो उन्हों ने सिर्फ ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी. उनके गोरे बदन पर पिंक ब्रा पेंटी क्या जच रही थी. एकदम आग का गोला लग रही थी.

 

आंटी मेरे पास आ कर बेठी. में कुछ बोल पाता, उस से पेहले ही वह मेरे होठो को चूमने लगी. में भी सब कुछ भूल कर उनको किस करने लगा. क्युकी मेरी तो मुराद पूरी हो गई थी. जिसे चोदने की तमन्ना दिल में थी, वो खुद मुझसे चुदवाने आई थी. हम कुछ देर किस करते रहे. और जबान लडाते रहे.

 

अब में आंटी के बूब्स को अपने दोनों हाथो से जोर जोर से मसल ने लगा. आंटी भी सिस्कारिया भरने लगी. आआआआ स्सस्सस्स ऊउह्ह्ह्ह हाहाहा आआआआ…. और जोर से दबा, मसल डाल मेरे बूब्स को. उसका पूरा पानी आज तू निकाल दे और उसे खाली कर दे. आज उसे चूस चूस कर एकदम से निचोड़ दे तू.

 

मेने उनकी ब्रा खोल दी. और उनके दोनों कबूतर बहार आ गये. में भूखे जानवर की तरह उन पर टूट पड़ा. आंटी को भी मजा आ रहा था. वो आहे भर रही थी. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. कुछ देर बूब्स चूसने के बाद मेने उनकी पेंटी उतार दी. आज उन्हों ने शेव की थी. एकदम चिकनी चूत थी उनकी, और उपर उठी हुई. मेने उस पर अपना हाथ रखा तो पूरी हथेली में समा गई.

 

फिर मेने उनको बिस्तर पर लेटा दिया, और उनकी चूत पर अपनी जबान फिराने लगा. आंटी जोश में आ गई. में भी मदहोश होकर उनकी चूत चाटने लगा. मेने अपनी जीभ उनकी चूत के छेद में घुसाई. जिस से आंटी कसमसा गई, कुछ देर बाद आंटी मेरे बाल पकड़ कर चूत पर दबाने लगी.

 

और आआआआ ऊऊऊ ऊऊऊईईईं आआआआ हाहाहा ह्ह्ह्हह मजा आ रहा है, और जोर से चूस, आज तक मेरी चूत को इतनी अच्छी चुसाई किसी ने नहीं की हे, आज तो तूने मुझे जन्नत दिखा दी. आज तक मेने ऐसी चुसाई नहीं की हे. में उसे बहोत जोर जोर से चूस रहा था |

 

और उसके एकदम अंदर तक मेरी जीभ डाल कर अंदर तक चूस रहा था और आंटी अब  अहह फह हहह फह अह्ह्ह कर रही थी और वह बहोत गरम हो गयी थी और उसकी चूत तो एक भट्टी की तरह तप रही थी और में उसे अपने मुह से चोद रहा था. थोड़ी देर में आंटी का  शरीर अकडने लगा और आंटी जड गई और उसने सारा माल मेरे मुह में ही डाल दिया था.. मेने सारा पानी अपने मुह में भर लिया.

 

और उनको किस करते हुए, वो सारा पानी उनके मुह में डाल दिया, जिसे वो पी गई. और अपनी जीभ से मेरे पुरे मुह को और जबान को चाट लिया. आंटी ने मेरी पेंट निकाल दी, और मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी. जिस से वो और टाइट हो गया. और वो गपा गप अपने मुह उस पर चलाने लगी. मेरा लंड उनके गले तक जा रहा था.

 

और में भी उनके बाल पकड़ कर अपने लंड पर डाल रहा था. वह आह फह हहह करते हुए मेरे लंड को पूरी मस्त के साथ चूस रही थी और ऐसा लग रहा था की वह मेरे लंड को कच्चा ही खा जाएगी मुझे तो ऐसा लग रहा था की में स्वर्ग में घूम रहा हु और वह मुझे जन्नत दिखा रही थी.

 

कुछ देर बाद में जड ने वाला था. तो आंटी ने मेरा माल पी ने की इच्छा जाहिर की, तो मेने अपना सारा माल उनके मुह में ही छोड़ दिया. फिर हमने खाने का ऑर्डर किया.

 

और साथ में खाना खाया. वह खाते समय भी मेरी तरफ कुछ ऐसे देख रही थी की मुझे कच्चा ही खा जाएगी. में भी उसे चोदने के लिए उतना ही ज्यादा उतावला हो रहा था. उसके बाद आंटी फिर से शुरू हो गई. और मेरी पूरी बॉडी को किस करने लगी, और फिर मेरे लंड को पकड़ कर चुसना शुरू कर दिया.

 

और मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. अब आंटी ने देर ना करते हुए बिस्तर पर लेट गई. और अपनी टांगे फेला दी, और मुझे इशारा दिया. अब ज्यादा वक्त में सहन नहीं कर सकती हु जल्दी से मेरी चूत में तुम्हारा लंड डाल और मेरी चूत को शांत कर दे. मेने भी देर ना करते हुए जटसे उनके उपर चड गया.

 

और दोनों टांगो को अपने कंधो पर रखा, और लंड को चूत पर सेट कर के एक जोरदार जटका मारा तो पूरा का पूरा लंड आंटी की चूत फाड़ता हुआ उस मे समा गया. तो आंटी थोडा चीखी, पर इनकी पेहले से ही फटी हुई थी तो ज्यादा दर्द नही हुआ.

 

फिर मेने जटके मारना शुरू किया. अब आंटी चिलाने लगी, आआआआआ ह्ह्ह्हह्ह हाहाहा ऊउम्म्म ऊह्ह्ह्ह आआआआ ऊओह्ह्ह चोद और जोर से चोद फाड़ दे मेरी चूत को बहोत खुजली पैदा करती हे, ये आज इसकी साडी खुजली मिटा दे, आआआआ ऊउह्ह्ह्ह अआहहा हाहाहा आआआआ ऊओम्म और जोर से आआआआ ह्ह्ह्हह्ह आआहः और फिर में भी अब फुल स्पीड में आ गया.

 

मुझे भी मजा आने लगा था. करीब २० मिनिट की घमासान चुदाई के बाद आंटी का पानी निकल गया, जिस से मेरा पूरा लंड ओर उनकी चूत गीली हो गई. जिस से पूरा कमरा फच फच फच फच फच फच की आवाज से गूंज रहा था.

 

और वह किसी कुत्ते की तरह हांफ रही थी और मुझे और जोर जोर से करने को कह रही थी आह ओह्ह हाहाह और का आज फाड़ दे मेरी रंडी चूत को आह्ह फह अहहह ओह्ह तेरा लंड तो बहोत कमाल का हे रे. मेने अपनी जिंदगी में इतनी लम्बी चुदाई कभी भी नहीं की हे.  कुछ देर बाद में भी जड ने वाला था.

 

तो आंटी ने बोला, चूत में डाल दे. इसकी प्यास मिट जायेगी. अब मेने अपनी स्पीड ओर बढ़ा दी, और आंटी की चूत में ही जड गया. और साथ ही आंटी भी एक बार फिर से जड गई.

 

और फिर हम दोनों ऐसे ही एक दुसरे से लिपटे हुए पड़े रहे. उस दिन शाम तक मेने आंटी को ३ बार चोदा. फिर शाम को हम वापस घर आ गये, उस दिन के बाद आंटी मेरी रखेल बन गई, और जब भी मन होता में उनकी चुदाई करता था. आंटी की गांड चुदाई अगले पार्ट में, तो दोस्तों मुझे मेल जरुर करे.

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