रश्मि के साथै सेक्स की रस्म निभाई भाग -२

मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसका चुचूक मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगा। उसके मुँह से सीत्कार निकलने लगी थी। वो मुझसे बोली,”रोहन तुम भी अपनी जींस उतार दो न !”

मैंने अपनी जींस और शर्ट उतार फेंकी। अब मैं बस अंडरवीयर में था तो उसने उसे भी उतारने को कहा।

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मैंने कहा- मैं ही सब उतार दूँगा तो तुम्हारे कौन उतारेगा?

मेरी बात सुन कर वो जोर जोर से हंसने लगी।

फिर मैंने उसके ब्रा खोल दी और उसके दोनों स्तनों को आजाद कर दिया उसके स्तन बिलकुल गोल और भारी थे फिर मैंने उसकी कैप्री और पेंटी भी उतार दी। अब वो मेरे सामने बिलकुल प्राकृतिक अवस्था में थी और बहुत शरमा रही थी।

उसके योनिद्वार पर हल्के-हल्के रोये थे, चीरा बिलकुल गुलाबी था। मैंने अपना मुँह उसकी योनि के पास रखा तो उसकी योनि की गंध मेरी नाक में भर मुझे मदहोश कर गई। मैंने अपनी जीभ उसकी योनि पर रख दी और उसे चाटने लगा। उसकी योनि ने चिकना सा पानी छोड़ दिया। रश्मि सिसकारियां भरने लगी। मैंने अब अपनी जीभ उसकी योनि में अंदर तक भरनी चाही तो रश्मि थोड़ी सी कुनमुनाई और मेरा सर पकड़ कर अपनी योनि से सटा लिया। रश्मि का जिस्म अकड़ने लगा और वो उसने अपना रज छोड़ दिया जिसे मैंने चाट के साफ़ कर दिया।

रश्मि अब उठ खड़ी हुई और मुझे एक बार फिर जोर से चूमते हुये बोली,”आई लव यू रोहन, सो मच !”

 

मैं भी कहा,”आई लव यू टू रश्मि !”

मैंने घड़ी में देखा कि 8:30 बज गए थे। मैंने रश्मि से कहा,” ओह माय गोड ! मुझे तो घर जाना है !”

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तो रश्मि बोली “ओह रोहन ! प्लीज, थोड़ी देर रुक जाओ अभी मत जाओ ना ! घर पर फोन करके कह दो कि तुम अपने दोस्त के घर ग्रुप स्टडी कर रहे हो।”

मेरा भी मन जाने का कहाँ कर रहा था। मैंने घर फोन कर दिया।

हम अभी भी प्राकृतिक अवस्था में ही थे। फिर रश्मि को शरारत सूझी और उसने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और झट से मेरे ऊपर आ गई और मेरा अंडरवीयर खींच कर उतार दिया और अपना मुँह नीचा करके मेरे लिंग को सहलाने लगी मेरा लिंग बिलकुल तन गया था।

वो अपने होंठों से उस पर पुचकारने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था धीरे धीरे उसने लिंगमुंड पर जीभ फिरानी शुरू कर दी और फिर पूरा लिंग मुँह में भर कर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी। मैं तो जैसे सातवें आसमान पर था।

वो उसको ऐसे कस के चूस रही थी जैसे उसे पूरा ही निचोड़ लेगी। मैं अपने आपको ज्यादा देर नहीं रोक पाया और मैंने अपना कामरस उसके मुँह में ही छोड़ दिया। वो मेरा सारा कामरस पी गई। मैंने उठ कर उसके होंठों को चूम लिया।

रश्मि ने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा जैसे पूछ रही हो,”कैसा लगा?”

“रश्मि मेरी जान बहुत मज़ा आया।”

वो तो बस मंद मंद मुस्कुराती ही रही।

“रश्मि क्या कभी पहले तुमने सेक्स किया है?” मैंने पूछा।

“धत्त…. ?” उसने शरमा कर अपनी नज़रें झुका लीं!

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मैं जानता था कि रश्मि तो अभी बिलकुल कोरी है। मैंने पूछा “प्लीज बताओ न?”

वो शरमाते हुए बोली,”किया तो नहीं पर………!”

“पर क्या………..?”

“पर… मन बहुत करता है करने का !”

“ओह मेरी प्यारी रश्मि ! तुमने तो मेरे मुँह की बात बोल दी, तुम कितनी अच्छी हो तुम, अगर तुम मेरा साथ दो तो हम अपने प्रेम प्रसंग की नई गाथा लिख सकते हैं। क्या तुम मेरा साथ दोगी?”

रश्मि ने शरमाते हुए अपना सर नीचे कर लिया और उसने हाँ में सर हिला दिया बस, कहा कुछ नहीं।

फिर मैंने रश्मि की कमर हाथ डाल कर उसे फिर से बाहों में भर लिया। मैं उसके गर्दन, होंठों, गालों और स्तनों पर जहां तहां चूमने लगा। रश्मि ने मुझे एक धक्का दिया और नीचे गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई।
“ओह… तुमसे तो कुछ होता नहीं है ! अब मैं तुम्हें चोदूंगी!”

मुझे उसकी इस नादानी और भोलेपन पर हँसी आ गई। मैंने कहा,”ठीक है मेरा कौन सा कोई नुकसान है, बात तो एक ही है, चाहे छूरी तरबूजे पर गिरे या तरबूज छुरी पर !”

“चलो देखते हैं।” कह कर वो मेरा काम दंड पकड़ कर अपने योनिछिद्र पर मलने लगी।

उसके मुँह से सिसकारियाँ निकले जा रही थी। फिर मैंने उसकी कमर पकड़ कर धीरे से नीचे से ही एक झटका लगा दिया। लिंगमुंड उसकी योनि में गच्च की आवाज के साथ प्रवेश कर गया। उसकी एकदम से चीख निकल गई।

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एक बार तो मैं भी डर ही गया पर बाद में मैंने उसे पुचकारा।

“ओह…… रोहन बहुत दर्द हो रहा है !”

वैसे दर्द तो मुझे भी हो रहा था क्योंकि उसकी योनि बहुत ज्यादा भिंची हुई थी। मैंने उससे कहा- पहली बार में दर्द होता है, पर बाद में बहुत मज़ा आएगा !

तो उसने अपना सर मेरे सीने पर रख दिया और सुस्ताने लगी। धीरे धीरे उसका दर्द कम हो गया, मुझे चूमने लगी और होले होले खुद धक्के लगाने लगी। मैंने रोशनी में देखा कि मेरा लिंग पूरा लाल हो रहा है जो कि रश्मि की कुंवारी चूत से निकला खून था।

वो ऐसे ही मुझे करीब 5 मिनट तक धक्के देती रही, और उसके हाथ में बंधी रेशम की डोरी कानों में मधुर संगीत घोलती रही। मुझे लगा कि वो थक गई है। मैंने झट से उसे नीचे कर दिया और खुद उसके ऊपर आ गया।

उसने अचंभित होकर मेरी ओर देखा तो मैंने कहा,”मैं किसी का उधार नहीं रखता ! अभी तक तुमने मुझे चोदा ! अब मैं तुम्हें चोदूंगा !”

वो खिलखिला कर हंस पड़ी।

और फिर मैं जोर जोर से धक्के देने लगा। करीब 8-10 मिनट धक्के लगाने के बाद रश्मि ने मुझे कस के पकड़ लिया और अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए। मैं समझ गया कि रश्मि ने दुबारा अपना रज छोड़ दिया है।

मैं भी अपना कामरस छोड़ने वाला था और अपना लिंग उसकी योनि से बाहर निकालने लगा तभी रश्मि ने अपनी टाँगे मेरी कमर में डाल दी और कहा- निकालो नहीं, अंदर ही डाल दो।

और फिर मैंने रश्मि कि योनि में ही अपने वीर्य की पिचकारियाँ छोड़ दी। रश्मि की योनि मेरे द्रव से भर गई। मैं उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया और वो मेरे गालों पर किस करने लगी।

हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे और एक दूसरे को नज़रों से ही धन्यवाद का भाव प्रकट कर रहे थे। मैंने रश्मि को कस कर बाहों में पकड़ा और एक बार फिर से चूम लिया। फिर मैं रात को रश्मि के घर ही रुक गया और रात को हमने दो बार और प्रेम मिलन किया। मैं उसे सारी रात अपनी बाहों में लिए सोता रहा।

अगले दिन मैंने रश्मि को मेडिकल स्टोर से आई-पिल लाकर दी। मैं उसे गर्भवती कैसे होने दे सकता था। मैंने उससे हमारे प्रेम के प्रतीक के रूप में उसके हाथ में बंधी रेशम की डोरी मांग ली। उसने बड़ी अदा से मुस्कुराते हुए वो डोरी मेरी ओर बढ़ा दी। आज भी वो डोरी मैंने बहुत जतन से संभाल कर रखी है।

यह मेरी जिंदगी का पहला प्रेम सम्बन्ध था। आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे मेल करना।

आपके मेल की प्रतीक्षा में :

आपका रोहन उर्फ छोटा गुरु

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