ऋतु भाभी की जबरदस्त चुदाई की.

मेरी उमर इस समय 24 साल की है. शादी के 3 साल बाद ही एक रोड एक्षसीडेंट में भैया का स्वरगवस हो गया था. मैं भाभी के साथ अकेला ही रहता था. भाभी का नाम ऋतु है. हमारा अपना खुद का बिज़्नेस था.

 

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भैया के ना रहने के बाद मैं ही बिज़्नेस की देखभाल कराता था. भाभी बहुत ही खूबसूरात थी. वो मुझे राज कह कर ही बुलाती थी.

 

पापा और मम्मी का स्वरगवस बहुत पहले ही हो चुका था. मैं एक दम हटता कटता नौजवान था और बहुत ही ताकतवर भी. भाभी उमर में मुझसे 1 साल की छ्होटी थी. वो मुझे बहुत प्यार कराती थी.

भैया के गुजर जाने के बाद मैं भाभी की पूरी देखभाल कराता था और वो भी मेरा बहुत ख़याल रखती थी. मैं सुबह 10 बजे ही घर से चला जाता था और फिर रात के 8 बजे ही घर वापस आता था.

ये उस समय की बात है जब भैया को गुज़रे हुए 6 महीने ही हुए थे. एक दिन मेरी तबीयत खराब हो गयी तो मैने मॅनेजर से दुकान संभालने को कहा और दोपहर के 1 बजे ही घर वापस आ गया. भाभी ने पुचछा, क्या हुआ राज.

मैने कहा, मेरा सारा बदन दुख रहा है और लग रहा है की कुच्छ फीवर भी है. मेरी बात सुनकर वो परेशन हो गयी.

 

उन्होने मुझसे कहा, तुम मेरे साथ डॉक्टर के पास चलो. मैने कहा, मैने मेडिकल स्टोर से कुच्छ मेडिसिन ले ली है.

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मुझे थोड़ा आराम कर लेने दो. वो बोली, ठीक है, तुम आराम करो. मैं तुम्हारे बदन पर तेल लगा कर मालिश कर देती हूँ.

 

मैने कहा, नहीं, रहने दो, मैं ऐसे ही ठीक हूँ. वो बोली, चुप छाप अपने कमरे में जा कर लेट जाओ. मैं अभी तेल ले कर आती हूँ. मैं कभी भी भाभी की बात से इनकार नहीं कराता था.

मैं अपने कमरे में आ गया. मैने अपनी शर्ट और पेंट उतार दी और केवल बनियान और नेकार पहने हुए ही लेट गया. मैं एक दम ढीला था और थोड़ा छ्होटा नेकार ही पहनता था. भाभी तेल ले कर आई.

 

उन्होने मेरे सिर पर तेल लगाया और मेरा सिर दबाने लगी. उसके बाद उन्होने मेरे हाथ, सीने और पीठ पर भी तेल लगा कर मालिश किया.

 

आख़िर में वो मेरे पैर पर तेल लगा कर मालिश करने लगी. आख़िर मैं भी आदमी ही था. उनके हाथ लगाने से मुझे जोश आने लगा.

के मारे मेरा लंड खड़ा होने लगा और मेरा नेकार टेंट की तरह से उपर उठने लगा. धीरे धीरे मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और मेरा नेकार एक दम टेंट की तरह हो गया.

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मैं जनता था की नेकार के छ्होटा होने की वजह से भाभी को मेरा लंड थोड़ा सा दिखाई दे रहा होगा.

 

वो मेरे पैरों की मालिश करते हुए मेरे लंड को देख रही थी और उनकी आँखें थोड़ा गुलाबी सी होने लगी थी. उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान भी थी. मालिश करने के बाद वो चली गयी. उसके बाद मैं सो गया.

शाम के 6 बजे मेरी नींद खुली और मैं उठ गया. भाभी छाए लेकर आई. मैने छाए पी. उसके बाद मैं बाथरूम चला गया. बाथरूम से जब मैं वापस आया तो भाभी ने कहा, अब लेट जाओ, मैं तुम्हारे बदन की फिर से मालिश कर देती हूँ.

 

मैने कहा, अब रहने दो ना, भाभी. वो बोली, क्या मालिश करने से कुच्छ आराम नहीं मिला. मैने कहा, बहुत आराम मिला है.

 

वो बोली, फिर क्यों माना कर रहे हो. मैने कहा, तीक है, तुम केवल मेरे पैर की ही मालिश कर दो. वो खुश हो गयी. उन्होने मेरे पैर की मालिश शुरू कर दी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

इस बार मेरा नेकार थोड़ा पिच्चे की तरफ खिशकगया था जिस से भाभी को मेरा लंड इस बार कुच्छ ज़्यादा ही दिखाई दे रहा था.

 

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भाभी मेरे लंड को देखते हुए मेरे पैरों की मालिश कराती रही.

 

थोड़ी देर बाद वो बोली, मैं जब तेरे पैर की मालिश कराती हूँ तो तुझे क्या हो जाता है. मैं कहा, कुच्छ भी तो नहीं हुआ है मुझे. उन्होने मेरे लंड पर हल्की सी छपत लगते हुए कहा, फिर ये क्या है.

मैने कहा, जब तुम मालिश कराती हो तो मुझे गुदगुदी सी होने लगती है, इसी लिए तो मैं माना कर रहा था.

 

 

उन्होने मेरे लंड पर फिर से छपत लगते हुए कहा, इसे काबू में रखा कर.

 

मैने कहा, जब तुम मालिश कराती हो तो ये मेरे काबू में नहीं रहता. वो बोली, तुम भी अपने भैया की तरह ही हो. मैं जब उनके पैर की मालिश कराती थी तो वो भी इसे काबू में नहीं रख पाते थे.

 

मैने मज़ाक करते हुए कहा, फिर वो क्या करते थे. वो बोली, बदमाश कहीं का. मैने कहा, बताओ ना भाभी, फिर वो क्या करते थे.

 

भाभी शरमाते हुए बोली, वही जो सभी मर्द अपनी बीवी के साथ करते हैं.

 

मैने कहा, तब तो तुम्हें भैया के पैरों की मालिश नहीं करनी चाहिए थी. उन्होने पुचछा, क्यों. मैने कहा, आख़िर बाद में परेशानी भी तुम्हें ही उतनी पड़ती थी

. वो बोली, परेशानी किस बात की, आख़िर मेरा मन भी तो कराता था. मैने कहा, मेरा भी काबू में नहीं है, अब तुम ही बताओ की मैं क्या करूँ. वो बोली, शादी कर ले. मैने कहा, मैं अभी शादी नहीं करना चाहता. उन्होने मुस्कुराते हुए कहा, फिर बाथरूम में जा कर मूठ मार ले.

मैने अंजन बनते हुए पुचछा, वो क्या होता है. वो बोली, क्या सच में तुझे नहीं मालूम है की मूठ मारना किसे कहते हैं. मैने कहा, नहीं.

 

उन्होने मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा, इसे अपने हाथ में पकड़ कर अपना हाथ तेज़ी से आगे पिच्चे करना. थोड़ी ही देर में इसका जूस निकल जाएगा और ये शांत हो जाएगा. मैने कहा, तुम मुझे थोड़ा सा कर के बता दो.

भाभी जोश में आ ही चुकी थी. वो बोली, तू बहुत ही बदमाश है. इसे बाहर निकल, मैं बता देती हूँ की कैसे करना है. मैने कहा, तुम खुद ही इसे बाहर निकल कर बताओ की कैसे करना है.

 

उन्होने शरमाते हुए मेरे लंड को पकड़ कर नेकार से बाहर निकल लिया. जैसे ही मेरा 9″ लंबा लंड बाहर आया तो वो बोली, बाप रे, तेरा तो बहुत ही बड़ा है और मोटा भी. मैने पुचछा,

अच्च्छा नहीं है क्या. वो शरमाते हुए बोली, बहुत ही अच्च्छा है. मैने पुचछा, भैया का कैसा था. वो बोली, उनका भी अच्च्छा था लेकिन तेरे जैसा लंबा और मोटा नहीं था. मैने कहा, अब बताओ की कैसे करना है. उन्होने मेरे लंड को पकड़ कर अपना हाथ आगे पिच्चे करना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मज़ा आने लगा. वो भी जोश में आने लगी.

2 मीं मूठ मरने के बाद वो बोली, ऐसे ही कर लेना. अब जा बाथरूम में. मैने कहा, बाथरूम में क्यों, अगर मैं यहीं कर लेता हूँ तो इसमें क्या बुराई है. वो बोली, तेरा जूस यहाँ गिरेगा और मुझे ही सॉफ करना पड़ेगा.

मैने कहा, मैं ही सॉफ कर दूँगा. वो बोली, ठीक है, यहीं कर ले. मैं जाती हूँ. मैने उनका हाथ पकड़ कर कहा, तुम यहीं बैठो ना. वो बोली, तेरे लंड पर हाथ लगाने से मुझे पहले ही थोड़ा सा जोश आ चुका है.

 

 

अगर मैं तुझे मूठ मराते हुए देखूँगी तो मुझे और ज़्यादा जोश आ जाएगा. फिर मेरे लिए बर्दस्त करना मुश्किल हो जाएगा.

 

आख़िर मैं भी तो औरात हूँ और अभी जवान भी. मैने कहा, मुझ पर भरोसा रखो, मैं तुम्हारे साथ कुच्छ भी नहीं करूँगा. वो बोली, मुझे पूरा भरोसा है तभी तो मैने तेरे लंड को पकड़ कर तुझे मूठ मारना बताया है. मैने पुचछा, नेकार उतार डून या ऐसे ही मूठ मार लूँ. वो बोली, क्या नेकार भी खराब करेगा. उतार दे इसे.

मैने अपना नेकार उतार दिया और मूठ मरने लगा. भाभी मुझे मूठ मराते हुए देखती रही. मैं भाभी को देखता हुआ मूठ मार रहा था. धीरे धीरे वो और ज़्यादा जोश में आ गयी. जोश के मारे मेरे मूह से आ… ऊ… की आवाज़ निकल रही थी.

वो मुझे और कभी मेरे लंड को देख रही थी. उन्होने अपना एक हाथ अपनी चुत पर रख लिया और सहलाने लगी. मैने पुचछा, क्या हुआ. वो बोली, तू मुझे एक दम पागल कर देगा. मैं जा रही हूँ. मैने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा, बतो ना मेरे पास.

 

वो चुप छाप बैठ गयी. मैं मूठ मराता रहा

. भाभी जोश के मारे पागल सी हो चुकी थी. थोड़ी ही देर में उन्होने मेरा लंड पकड़ लिया और बोली, अब रहने दे, अब मुझसे बर्दस्त नहीं हो रहा है. मैने पुचछा, क्या हुआ. उन्होने अपना पेटिकोट उपर कर दिया और बोली, देख मेरी चुत भी एक दम गीली हो गयी. तूने तो मुझे पागल सा कर दिया है.

अब मुझे बर्दस्त नहीं हो रहा है, तू मेरी चुत को शाला दे, मैं तेरा लंड सहला देती हूँ.

 

मैने कहा, केवल सहलाना ही है या कुच्छ और करना है. वो बोली, अगर तेरा मन करे तो मेरी चुत को थोड़ा सा चाट ले जिस से मुझे भी थोड़ा आराम मिल जाएगा. मैने कहा, कपड़े तो उतार दो. वो बोली, तू खुद ही उतार दे.

मैने भाभी के कपड़े उतार दिए. अब वो एक दम नंग हो गयी.

 

उनकी चुत एक दम सॉफ थी. मैने कहा, तुम्हारी चुत तो एक दम सॉफ है. वो बोली, मुझे चुत पर बाल बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं इसी लिए मैं इसे हमेशा ही सॉफ रखती हूँ.

तेरा भी तो एक दम सॉफ है. मैने कहा, मुझे भी बाल पसंद नहीं हैं. वो लेट गयी तो मैने उनकी चुत पर अपनी जीभ फिरनी शुरू कर दी. वो बोली, ऐसे नहीं. मैने कहा, फिर कैसे. वो बोली, मुझे भी तो तेरा चूसना है. तू मेरे उपर उल्टा लेट जा और अपना लंड मेरे मूह के पास कर दे फिर चाट मेरी चुत को.

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