ड्राईवर और नौकर से चुदवाया भाग-२

हाय हाय फट गई मेरी ! फाड़ दी मेरी चूत ! आह अह चोद साले ! मुझे चोद दिलभर के चोद ! चाहे फट जाए ! राधे मेरे अंगूर चूस ! इनको दबा ! इनका रस पी ! मुझे तृप्ति दे दो मिल कर ! मेरी प्यास बुझा दो राजा !

बहन की लौड़ी, मालकिन अब से तू मेरी कुतिया है ! कुतिया समझी रांड !

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हाँ मेरे राजा, मैं तेरी रांड ही सही ! तेरी रखैल ! पर अज मैंन्नूँ ठण्ड पा दयो !

वो जोर जोर से मुझे चोदने लगा, उसका एक एक झटका मुझे स्वर्ग दिखा रहा था।

 

हाय साईं ! मैं छूटने वाली हूँ ! तेज़ी से कर ! अह ! यह ले ! यह ले ! करते हुए दोनों एक साथ छूटे !

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यह क्या करवा लिया मैडम आपने ! मुझे रोका नहीं और सारा माल अपनी चूत में डलवा लिया?

मुझे माँ बनना है ! सासू माँ मुझे कसूरवार ठहराती हैं ना कि अपने खूसट बेटे को !

आ राधे, तू मेरी गांड मार !

अभी लो मैडम !

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उसने थूक लगा कर अपने लौड़े का सर मेरी गांड के छेद पर टिका दिया, झटका मारा और उसका लौड़ा फंस गया और मेरी चीख निकल गई।

हाय छोड़ दे हरामी ! मुझे क्या मालूम था कि तू फाड़ देगा !

बहन की लौड़ी ! तेरी माँ की चूत ! अब तो इसी में घुसेगा !

मैं उसके नीचे से निकल गई, वो मेरी टांग पकड़ मुझे फिर अपने पास लाया।

 

कमीने, चूत मार ले !

उसने जोर से थप्पड़ मारा मेरी गांड पर और बोला- साली ऐंठ रही है !

उसने मुझे पकड़ लिया और थूक लगा कर फिर से डाला !

छोड़ दे !

घनशाम ! इसे पकड़ !

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उसने मेरी बाँहों को पकड़ लिया और राधे ने अपना लौड़ा मेरी गांड में घुसा के दम लिया। मेरी आँखों से आंसू निकल आए।

 

चिल्ला, और चिल्ला ! जोर से चिल्ला ! चल इस पर बैठ जा !

मैं उसकी तरफ पीठ करके गांड में डलवा बैठ गई और ऊपर-नीचे होकर चुदने लगी।

 

अब मुझे मजा आने लगा, वो भी नीचे से मुझे उछालता हुआ चोद रहा था।

 

घनशाम ने मेरे मुँह में डाल दुबारा खड़ा कर लिया और मेरी और राधे की टांगो के बीच घुटनों के बल बैठ कर मेरी चूत में ऊँगली डालने लगा।

 

उधर राधे गांड फाड़ रहा था। घनशान ने मुझे पीछे धक्का देकर उसने अपना लौड़ा भी मेरी चूत में घुसा दिया।

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हाय कमीनो ! आज ही फाड़ दोगे ? मैं कहीं भागी जा रही हूँ ?

चल साली !

दोनों तरफ से ज़बरदस्त वार हो रहे थे, बीच में मैं फंसी हुई मजे ले रही थी।

 

आखिरकार आज मेरे जिस्म को ठण्ड पड़ गई, मेरी प्यास बुझ गई।

 

फिर घनशाम किसी कारण छुट्टी पर चला गया और राधे से मुझे इतना मजा नहीं आता था।

 

मैं घनशाम से मिलने उसके घर पहुँच गई जहाँ वो अपने तीन साथियों के साथ बैठा ताश खेल रहा था और पांचवां राधे जो मुझे लेकर गया।

 

मैंने उसे इशारे से बुलाया और पूछा- काम पर क्यूँ नहीं आता?

बोला- पैसे कम मिलते हैं इसलिए !

मैं दूंगी पैसे तुझे ! कल से वापस लौट आ !

कह कर मैं मुड़ी ही थी कि उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया, |

 

वहीं चूमने लगा- मैडम आप बहुत अच्छी हो ! पहली बार गरीब की चौखट पर आई हो, कुछ तो लेना होगा- चाय, कॉफी !

नहीं, बस फिर कभी ! कल आ जाना !

उसने मुझे खींच कर बिस्तर पर गिरा दिया।

 

उसके बाद क्या हुआ, जानने के लिए अगली कड़ी पढ़ना मत भूलना !

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